मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

उत्तराखंड के नए नामदेव धामी

 

उत्तराखंड यानि देवभूमि। यहां के मुख्यमंत्री को भी हम देवता ही मानते हैं और हमें आज लगा कि  उनका नाम पुष्कर धामी नहीं बल्कि नामदेव धामी होना चाहिए।  वे राजनीति की उस वंश परम्परा से आते हैं जो इतिहास बनाने के बजाय उसे बदलने की होड़ में शामिल है। मुगलों कि बाद सबसे पहले नाम बदलने का शौक चर्राया था बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो बहन मायावती को ,लेकिन बाद में इसे भाजपा ने हडपलिया। भाजपा का हर मुख्यमंत्री अपने-अपने सूबे में ' नाम बदलो 'अभियान का सूत्रपात कर  चुका है ,और अब धामी साहब ने एक साथ डेढ़ दर्जन ठिकानों के नाम बदलकर अपने सभी वरिष्ठों को इस अभियान में पीछे छोड़ दिया है। 

धामी साहब वैसे भी किसी काम के मुख्यमंत्री नहीं है।  वे आम कठपुतलियों की तरह दिल्ली के इशारे पर नर्तन करते है। उनके पास करने के लिए कुछ है भी नहीं,क्योंकि उत्तराखंड में जो करते हैं वो सब देवता करते हैं वो भी दिल्ली कि देवता । नेता तो हाँ में हाँ मिलाते है।  मुमकिन   है कि  थोक में नाम बदलने का आदेश भी धामी जी को ख्वाब में किसी देवता ने दिया हो। पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधमसिंह नगर जनपद में स्थित विभिन्न स्थानों के नाम में परिवर्तन की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि  जनभावना और भारतीय संस्कृति व विरासत के अनुरूप ये नामकरण किए जा रहे हैं। इससे लोग भारतीय संस्कृति और इसके संरक्षण में योगदान देने वाले महापुरुषों से प्रेरणा ले सकेंगे।

धामी नकलची वानर की तरह है।  उन्होंने ' सौगाते मोदी ' की नकलकर उत्तराखंड के मुसलमानों को 'सौगाते धामी' के नाम से ठीक ईद के दिन मुस्लिम शासकों द्वारा बसाये गए तमाम शहरों के नाम बदलने का तोहफा दिया है। जैसे अब हरिद्वार जिले का औरंगजेबपुर- शिवाजी नगर गाजीवाली- आर्य नगर,चांदपुर- ज्योतिबा फुले नगर,मोहम्मदपुर जट- मोहनपुर जट ,खानपुर कुर्सली- अंबेडकर नगर,इदरीशपुर- नंदपुर,खानपुर- श्री कृष्णपुर,अकबरपुर फाजलपुर- विजयनगर के नाम से जाने जायेंगे। 

देहरादून जिले में मियांवाला- रामजीवाला,पीरवाला- केसरी नगर ,चांदपुर खुर्द- पृथ्वीराज नगर,अब्दुल्लापुर- दक्षनगर कहे जायेंगे। नैनीताल जिला

का नवाबी रोड- अटल मार्ग ,पनचक्की से आईटीआई मार्ग- गुरु गोवलकर मार्ग ,उधम सिंह नगर जिलाकी नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी- कौशल्या पूरी कही जाएगी। नाम बदलने से न मुसलमानों का कुछ बिगड़ना है और न हिन्दुओं का। क्योंकि जिसकी गर्भनाल जहां जमीदोज है उसे तो धामी जी उखड़वा नहीं सकते।  नाम बदलने को मुगलिया संस्कृति मानता हूँ ।  मुगलों ने किसी जगह का नाम क्यों बदला ये बताने वाला कोई मुगल सम्राट ज़िंदा नहीं है ,लेकिन मैंने जितना इतिहास पढ़ा है उससे मैं ये समझा है कि  वे जहाँ भी महीना-दो महीना अपना लश्कर रोकते थे उसे नया नाम दे जाते थे। उन्होंने समोने में भी नहीं सोचा होगा की भारत में पांच सौ साल बाद कोई उन्हीं की तरह नकल करते हुए फिर से उनके बसाये,बसाये  शहरों का नाम बदल देगा। 

मेरी समझ में नहीं आता कि भाजपाई हों या बसपाई,सपाई हों या कांग्रेसी ये नयी बसाहट करने कि बजाय पुरानी बसाहटों कि नाम क्यों बदलते हैं।  कांग्रेस कि ज़माने  में हमारे मध्यप्रदेश में कांग्रेस कि एक नेता माधवराव सिंधिया कि नाम से [साडा ] ने एक शहर ग्वालियर में तीस साल पहले बसने की कोशिश की थी लेकिन बेचारा आज तक नहीं बस पाया। क्योंकि नया शहर बसना आसान काम नहीं है। मुगलों ने ये काम कैसे कर लिया  राम ही जानें ? भाजपा की सरकार भी देश में 10  साल से है लेकिन मोदी जी ने एक भी नया नगर नहीं बसाया। ऐसे में वे मुगलों से केवल नफरत कर सकते हैं,मुकाबला नहीं। नया नगर बसने की कुब्बत उत्तर प्रदेश कि मुख़्यमंत्रो योगी आदित्यनाथ में भी नहीं है ।  वे भी इलाहबाद को प्रयागराज कर पाए। नया नगर नहीं बसा पाये । इलाहबाद है कोर्ट का नाम आज भी इलाहबाद है कोर्ट ही है।  हमारे मध्यप्रदेश में भी होशंगाबाद का नाम बदला गया ।  हबीबगंज स्टेशन को रानी  कमलापत कर दिया गया ,क्योंकि ये आसान काम है। 

किसी बसाहट या संस्था का नाम बदलना ,उसकी बदलियत बदलने जैसा अक्षम्य अपराध नहीं है ,किन्तु होना चाहिए। किन्तु   भाजपा सरकार तो ये काम करने से रही ।  वैसे ये अपराध किस राजनीतिक दल ने नहीं किया ? कांग्रेस के लबे कार्यकाल में किसी बसाहट की बल्दियत बदली गयी हो तो सुधि पाठक मुझे भी बताने की कृपा करें।  नाम को व्याकरण में संज्ञा कहते हैं। संज्ञा बदली नहीं जाती लेकिन भाजपाई कुछ भी बदल सकते हैं।  मेरा मश्विरा है कि वे देश में रहने वाले करोड़ों मुसलमानों को तो देशनिकाला दे नहीं सकते  सो क्यों न मुसलमानों की बिरादरी का नाम बदलकर किसी भाजपा नेता कि नाम उसे नया नाम दे दें। हमेशा कि लिए रट्टा ही खत्म हो जाये।

जहाँ तक मुझे याद आता है कि  मोदीजी के राज में एक संसद भवन नया जरूर बना है ।  इसके लिए उन्हें साधुवाद।  कांग्रेस ये सुकृत्य नहीं कर पायी जबकि पचास साल से ज्यादा सत्ता में रही। अब ये बात और है कि नया संसद भवन पहली ही बरसात में टपकने लगा। क्या ही बेहतर हो कि  पुराने को पुराना रहने दिया जाये और नया ही कुछ किया जाये। नया करना ही पुरुषार्थ है ।  ये नहीं कि  किसी स्टेडियम पर कोई अपना नाम चस्पा कार दे और इतिहास पुरुष बन जाये। बहरहाल पुष्कर धामी को बधाई की वे भी नामदेव बन गये । 

@ राकेश अचल

सोमवार, 31 मार्च 2025

तरण पुष्कर 1अप्रैल से शुरू होगा, पूर्व सांसद शेजवलकर ने पहली छलांग लगाकर तैराकी का शुभारंभ किया

ग्वालियर  31 मार्च ।  गर्मी के मौसम में शहरवासियों के लिए राहत देने के नगर निगम द्वारा संचालित तरण पुष्कर 1 अप्रैल से आमजन के लिए खोला जाएगा । तरण पुष्कर में पूर्व सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने पहली छलांग लगाकर तैराकी का शुभारंभ किया।

नोडल अधिकारी एवं उपायुक्त सत्यपाल सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि तरण पुष्कर स्विमिंग पूल पर आज संगीत मय सुंदरकाड का पाठ कर विधि विधान से पूजा अर्चना की, इस मौके पर श्री विवेक शेजवलकर पूर्व सांसद, सभापति श्री मनोज तोमर, वरिष्ठ भाजपा नेता रामेश्वर भदोरिया, धर्मेन्द्र राणा, एवं निगमायुक्त श्री संघ प्रिय, उपायुक्त श्री सत्यपाल चौहान, सहायक खेल अधिकारी श्री जीतेंद्र यादव, श्री अयोध्याशरण शर्मा, सुश्री विजेता चौहान एवं तरण पुष्कर स्टाफ  मौजूद था

तैराकी के बैच सुबह 6 से 10 एवं शाम 5 से 8 तक रहेंगे, प्रत्येक वैच 45 मिनट का रहेगा, मुख्य कोच अयोध्या शरण शर्मा ने तैराकी आने वाले सभी सदस्यों से अपनी अपनी स्विमिंग कोस्टूम साथ लाने अनुरोध किया है, वगैर कोस्टूम तैराकी नहीं कर सकेंगे, एवं प्रथम दिवस निर्धारित समय प्रवेश कार्ड अनुसार समय से 10 मिनट पूर्व आने की सलाह दी है।

तापमान बढने के कारण 1अप्रैल से स्कूलों का समय बदला

 ग्वालियर 31 मार्च ।  ग्रीष्म ऋतु के दौरान बढ़ते हुए तापमान को ध्यान में रखकर जिले में बच्चों के हित में स्कूलों के संचालन के समय में बदलाव किया गया है। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री अजय कटियार ने इस आशय का आदेश जारी कर दिया है। 

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार जिले में अब प्ले ग्रुप से दूसरी कक्षा तक के लिये प्रात: 9 बजे से दोपहर एक बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। इसी तरह तीसरी से बारहवीं तक की कक्षाएँ प्रात: 8 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक संचालित होंगीं। परीक्षायें यथावत संचालित रहेंगीं। यह आदेश एक अप्रैल से प्रभावशील होगा और जिले की सभी शासकीय-अशासकीय और अनुदान प्राप्त शालाओं पर लागू होगा। 

मोदी जी का संघं शरणम गच्छामि

 

प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र दामोदर  दास मोदी जी के 12  साल बाद संघ की शरण में जाने के लोग अलग-अलग अर्थ निकाल रहे हैं र  । संघी कुछ कहते हैं और विपक्ष कुछ और ।  लेकिन मुझे इसमें  कोई भी नयी बात नजर नहीं आती। संघ आख़िरकार मोदी जी का दीक्षास्थल है और संघ की कृपादृष्टि से वे 2014  में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार और फिर लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। 

माननीय मोदी जी का संघ यानि राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ के नागपुर मुख्यालय पहुंचना ठीक वैसा ही जैसा की किसी की घर वापसी होती है। कहतें हैं कि चाहे बाघ हो, चाहे नाग अंतिम  समय में अपनी गुफा या बिल में प्रवेश करके ही शांति अनुभव करता है। माननीय मोदी जी तो मनुष्य हैं ',नान -बायलोजिकल मनुष्य' उन्हें भी अंतिम समय में अपनी मांद की ,बिल की,घर की याद आना स्वाभाविक है।  मोदी जी को अब शायद कोई चुनाव नहीं लड़ना है, इसलिए वे संघ को उसके तमाम अस्त्र-शस्त्र ,कवच,कुंडल वापस करने गए हों ताकि संघ उन सबको मोदी जी के नए  उत्तराधिकारी के लिए धो-मांजकर  तैयार कर ले। आखिर मोदी जी कब तक प्रधानमंत्री पद पर टिके रह सकते है।  इससे पहले कि जनता उन्हें हटाए, संघ खुद उन्हें घर बुला लेना श्रेयस्कर समझेगा। 

जहाँ तक मैं संघ को जानता और समझता हूँ उसके मुताबिक संघ अपने विस्तार में बाधक   किसी भी अवरोध को दूर करने में कोई संकोच नहीं करता।  संघ ने देख लिया है ,जान लिया है कि मोदी जी अब 2029  के आम चुनाव के काम के नहीं रहे ।  वे तीसरी बार प्रधानमंत्री जरूर बन गए लेकिन उन्हें    उन दलों से बैशाखियाँ लेना पड़ीं जिनका चाल,चरित्र और चेहरा संघ और भाजपा से कतई मेल नहीं खाता। संघ की कोशिश भी है और शायद योजना भी कि मोदी जी को स-सम्मान घर बुला लिया जाये।  संघ मोदी जी को आडवाणी  गति प्रदान नहीं करना चाहता ,क्योंकि मोदी जी ने मनसा,वाचा ,कर्मणा संघ  की  कार्यसूची पर अमल करते हुए देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की दिशा में निशि-याम काम किया है। मोदी जी राष्ट्रनिर्माण में इतने व्यस्त रहे की वे 12  साल में न मणिपुर जा पाए और न नागपुर। 

मोदी की कर्तव्यनिष्ठा पर कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगा सकता। लक्ष्य प्राप्ति के लिए संघ का एक प्रचारक जितना निर्मम हो सकता है मोदी जी ने अपने आपको उससे कहीं ज्यादा निर्मम प्रमाणित किया है।आज मोदीजी कि वजह से ही देश का अल्पसंख्यक मुसलमान पहली बार सड़कों पर ईद कि नमाज नहीं पढ़ सका।   मोदी जी से पहले माननीय अटल बिहारी वाजपेयी भी देश के प्रधानमंत्री  बने लेकिन वे भी देश में  हिंदुत्व का इतना तीव्र भूडोल नहीं  ला  सके थे।  वे सत्ता में जरूर आये थे लेकिन न वे जम्मू-कश्मीर से धारा 370  हटा पाए थे और न राम मंदिर बनवा पाए थे। वे तीन तलाक विधेयक भी  पारित नहीं करा पाए थे, उनके खाते में महिला शक्ति  वंदन विधेयक भी दर्ज नहीं है। हालाँकि वाजपेयी जी के मुकाबले मोदी जी पासंग भी नहीं हैं किन्तु उनके खाते  में वे तमाम उपलब्धियां दर्ज हैं ,जो वाजपेयी जी के खाते में नहीं है। 

मोदी जी पक्के शाखामृग हैं। संघ से  मोदी का दिल  का रिश्ता है। संघ के लिए वे गौतम बुद्ध की तरह अपनी पत्नी तक का त्याग कर चुके हैं। संघ के साथ उनका रिश्ता  दशकों पुराना है।  मोदी जी यदि  1972 में संघ की शरण में न आते तो वे कभी भी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे,संघ ने उन्हें चाय बेचने के श्रमसाध्य धंधे से बाहर निकाला। सन 1972 में नरेंद्र मोदी संघ  में शामिल हुए थे  प्रचारक बने. फिर संघ के मार्फत ही उन्हें भाजपा में प्रवेश मिला। गुजरात में संगठन की जिम्मेदारी मिली और बाद में वे  2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने ,लेकिन वर्ष 2023 के आम चुनाव में संघ और मोदी जी की भाजपा के सुर अचानक बदले ।  मोदी ने संघ परिवार के समानांतर अपना मोदी परिवार बनाया  । उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्ढा के मुंह से कहलवाया की अब भाजपा को संघ की जरूरत नहीं है।बावजूद इसके मोदी जी कि समझ में आ गया कि वे संघ से बड़े कभी नहीं हो सकते।  

संघ ने अपने अपमान का ये घूँट चुचाप पपी लिया यहां तक की संघ का शताब्दी वर्ष भी इसीलिए धूमधाम से नहीं मनाया। किन्तु समय रहते मोदी जी को अपनी गलतियों का आभास  शायद हो गया और वे अंतत: संघ की शरण में लौट आये।  संघ भी यही चाहता है कि  मोदी जी अब सिंहासन   खाली करें।  स-सम्मान करें तो बेहतर अन्यथा संघ को मोदी जी की शाखा लगाने में कोई देर होने वाली नहीं है। आज भी भाजपा में 70  फीसदी संघी ही है।  मोदी जी ने हालाँकि भाजपा का कांग्रेसीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई लेकिन संघियों ने प्रवासी यानि दलबदलू कांग्रेसियों को ज्यादा भाव नहीं दिया।  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बिभीषण आज भी संघियों के लिए अस्पृश्य ही है। 

कुल मिलाकर मोदी जी के संघ की शरण में वापस लौटने से भाजपा का नेतृत्व नयी पीढ़ी के हाथ में जाने के शुभ संकेत मिले हैं। मुझे लगता है कि अब भाजपा का नया अध्यक्ष  और देश का नया पंत प्रधान भी शीघ्र घोषित कर दिया जाएग।  मोदी जी 2029  के लिए सलामी लेने के लिए हमने शायद उपलब्ध  न हों। 

@ राकेश अचल

रविवार, 30 मार्च 2025

जिले के सभी बूथों पर सुना गया मन की बात कार्यक्रम

जिलाध्यक्ष सरोज राजपूत ने गिनाई वन नेशन वन इलेक्शन की जनता के हित में उपयोगिता

Aapkedwar news –अजय अहिरवार 

 टीकमगढ़। आज जिले के सभी बूथों पर सुना गया मन की बात कार्यक्रम। भाजपा मीडिया प्रभारी स्वप्निल तिवारी ने बताया कि आज जिले के सभी 808 बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मन की बात कार्यक्रम का 120 वां संस्करण सुना गया, जिसमें मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत ने भाजपा पदाधिकारियों आशुतोष भट्ट, रोहित खटीक , मनोज देवलिया, इंजी अभय प्रताप सिंह यादव, सुशीला राजपूत, पुष्पा यादव, अंशुल व्यास, पंकज प्रजापति ,शुभम व्यास, स्वप्निल तिवारी,धर्मेंद्र बुंदेला आदि के साथ कार्यक्रम को सुना, वहीं अन्य बूथों पर भाजपा पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों व कार्यकर्ताओं द्वारा मन की बात कार्यक्रम सुना गया। 

भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीमती सरोज राजपूत ने मुख्य रूप से उपस्थित रहे सुनील कटारे, मनोज बाबू चौबे व मुन्नी लाल यादव के साथ सभी समाज सेवा में लगे जिले में सक्रिय एनजीओ व जन अभियान परिषद के निमित्त जिले में सक्रिय समाजसेवियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक साथ चुनाव राजनीतिक आस्थिरता को कम करने में मदद करेगा , जिस नीति निर्माण में स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण सुनिश्चित होगा। देश हित में होने वाले इस निर्णय का हम सभी को आगे बढ़कर प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तक अपना समर्थन पहुंचाना है, जिससे हमारी आम जनता तक सदुपयोग के लिए भविष्य में राशि पहुंच पाए। 

 वहीं मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए बताया कि आज हो रहे भारत में त्योहारों में विविधता में भी एकता नजर आती है इसी एकता को हमें निरंतर मजबूत करना है। हर साल की तरह इस साल भी कैच डा रेन, से जल संरक्षण व संचय के लिए उपयोगी कार्य शुरू हो गए हैं।भारत में कई टेक्स टाइल स्टार्ट अप ने वेस्ट क्लॉथ पर काम शुरू कर इस चुनौती को एक सकारात्मक अवसर में बदला है।

चैत्र माह में चेतने का मौक़ा देती है प्रकृति

हिंदी का नया साल चैत्र मास से शुरू होता है। मेरे लिए ये महीना बहुत महत्वपूर्ण है। मेरी दादी बताया करतीं थीं   कि  मै चैत्र मास में ही अवतरित हुआ था। इसी महीने में चेतुओं की किस्मत चेतती है।  दादी निरक्षर थीं लेकिन पंचांग के बारे में उन्हें पता नहीं कहाँ से पता चल जाता था। वे बताती थीं कि  चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। इसी  दिन से चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का शुभारंभ भी होता है। इस बार चैत्र मास 30 मार्च 2025 यानी आज से शुरू हुआ तो दादी की बहुत याद आयी। वे पक्की सनातनी थीं किन्तु मैंने उन्हें कभी व्रत -उपवास करते नहीं देखा ,जबकि ठीक उनके विपरीत मेरी माँ को तीज-त्यौहार,व्रत,उपवास में गहरी दिलचस्पी थी। उनकी देखा-देखी मैंने भी अनेक बार चैत्र मास में 9 दिन के न सिर्फ व्रत किये बल्कि दो मर्तबा गवालियर से करौली तक 208  किमी की लम्बी और कठिन पदयात्रा भी की। 

आज का पंचांग बता रहा है कि इस तिथि पर रेवती नक्षत्र और ऐन्द्र योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है। इसके अलावा यह दिन हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2082 के रूप में आया है, जिसमें सूर्य और चंद्र देव दोनों मीन राशि में मौजूद हैं।आज के ही दिन देश-दुनिया में ईद का त्यौहार भी मनाया जा रहा है लेकिन  भारत में तमाम पाबंदियों के साथ। कहते हैं न कि  -जिसकी लाठी,उसकी भैंस। आज लाठी हमारे हाथ में हैं। इसलिए भैंस भी हमारी है। हमारी भैंस  के आगे बीन बजाने का कोई फायदा नहीं ,क्योंकि वो ससुरी खड़ी-खड़ी पगुराती रहती है ।  बीन की धुन पर नाचना उसे आता ही नहीं है।उसे न मणिपुर कि जलने से कोई फर्क पड़ता है और न कुणाल कामरा काण्ड से।  

आप कहेंगे कि  नया साल और नए साल का पहला  दिन में ये भैंस कहाँ से आ गयी। तो आपको बता दें कि  भैंस  से हमारा सनातन नाता है,ये बात अलग है कि  हम किसी भैंस को अपनी माता नहीं कहते,जबकि भैंस ,गौमाता से जायदा  दूध देती है,ज्यादा गोबर देती है और ज्यादा मांसाहार भी देती है। दुर्भाग्य ये है  कि  हमारे यहां भैंसपुत्र   केवल बलि के लिए इस्तेमाल किये जाते है।  किसी जमाने में भैंसे पंचायतों ,नगर निगमों में कचरा गाडी खींचने के काम भी आते थे किन्तु अब तो बेचारे सिर्फ  कटते हैं और लोगों के पेट भरने के काम आते हैं। भैंसों के नाम परदुनिया के  किसी देश में कोई राजनीती नहीं होती ।  कम से कम हमारे देश में तो नहीं होती ।  हमारे यहां गायों के नाम पर राजनीति भी होती है और लिंचिंग भी। दुर्भाग्य ये है कि  भारत में अभी तक किसी ने भैंसशाला नहीं खोली  इसीलिए भैंसे अक्सर सड़क पर आवारगी करते देखी जा सकतीं हैं।  

मै कट्टर सनातनी हूँ, फिर भी इन ज्योतिषियों की वजह से हमेशा परेशान रहते है।  ये हर त्यौहार को सुलभ के बजाय दुर्लभ बताकर ऐसा उन्माद पैदा करते हैं कि  आधा देश महाकुम्भ में नहाने जा धमकता है ,दीवाली पर ऐसा पुष्य योग बताते हैं कि  आधा देश भले कटोरा लिए खड़ा रहे लेकिन बाकी देश सर्राफा बाजार या मोटरकार   बाजार में खड़ा नजर आता है।  ज्योतिषी इस बार भी नहीं माने। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक लगभग 100 वर्षों बाद नवरात्रि के प्रथम दिन पंचग्रही योग का निर्माण भी हो रहा है. इसके साथ ही पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि ,इंद्र, बुद्धदित्य ,शुक्रदित्य, लक्ष्मी नारायण जैसे शुभ योग का निर्माण हो रहा है.।  हमारा   सौभाग्य है या दुर्भाग्य कि  ये ज्योतिषी हमारे पास ही सबसे जायदा है।  दूसरे मजहबों में भी हैं लेकिन वे इतने शातिर नहीं हैं जितने किहमारे हैं। हम पढ़े-लिखे हों या अनपढ़  सब के सब ज्योतिषियों के इशारों पर नाचते हैं। 

कभी-कभी मै सोचता हूँ कि  हमारे पास भले ही वैज्ञानिक कम हों किन्तु  ज्योतिषी इफरात में है। काश ऐसे ही ज्योतिषी म्यांमार वालों के पास होते ।  कम से कम वे ये तो बता देते कि  वहां  जो भूकमंप आया है वो किस दुर्लभ योग में आया है और उसके क्या लाभ-हानि है। किस राशि के जातकों के लिए भूकंप जानलेवा साबित होगा और कौन सा  महफूज रहेगा ? म्यांमार वालों के साथ हमारी गहन संवदना है ।  हमारी सनातनी सरकार ने म्यांमार के भूकंप पीड़ितों की इमदाद के लिए  लेफ्टिनेंट कर्नल जगनीत गिल के नेतृत्व में शत्रुजीत ब्रिगेड मेडिकल रिस्पॉन्डर्स की 118 सदस्यीय टीम आवश्यक चिकित्सा उपकरणों और आपूर्ति के साथ शीघ्र ही म्यांमार के लिए रवाना हुई. यह टीम जरूरी चिकित्सा उपकरणों और आपूर्ति के साथ एयरबोर्न एंजल्स टास्क फोर्स के रूप में तैनात की जा रही है, ये फोर्स आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा और सर्जरी सेवाएं देने के लिए प्रशिक्षित है। 

हम शुक्रगुजार   हैं भारत सरकार की दरियादिली के, कि  उसने कम से कम चैत्र मास में कोई तो पुण्यकार्य किया ! अन्यथा मुमकिन था कि  हमारे गृहमंत्री अड़ जाते कि - नहीं  ! म्यांमार में राहत भेजने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि वहां  के रोहिंग्या मुसलमान भी इस राहत का फायदा उठाएंगे। हमारी सरकार को मुसलमानों से खासी चिढ है,फिर चाहे वे हिन्दुस्तानी हों या बांग्लादेशी या म्यांमारी। हमारे यहां मुसलमान ही हैं जो सड़क पर नमाज नहीं पढ़ सकते,सड़क तो छोड़िये अपने घर की छत पर नमाज नहीं पढ़ सकते।  मुसलमानों को छोड़ दुसरे मजहबों का कोई भी आदमी कुछ भी कर सकता है। उसके लिए कोई पाबन्दी नहीं है। 

इस नवरात्रि पर मै भी 9  दिन के व्रत रख रखा हूँ ।  मेरी देवी में भारी आशक्ति है ।  मेरी कामना है कि  देवी माँ भारत की पुण्य भूमि पर पैदा होने वाले हर हिंदुस्तानी का कल्याण करें ।  मुझे उम्मीद है कि  ऐसा होगा भी ,क्योंकि हमारी देवियाँ नेताओं की तरह हिन्दू-मुसलमान नहीं देखतीं कल्याण करते वक्त। हमने जितनी भी किम्वदंतियां या लोक कथाएं पढ़ी हैं उनमें  किसी में भी किसी देवी ने किसी खान  साहब का वध नहीं किया। उन्होंने महिषासुर को मारा। मुसलमानों में भी शैतान के बच्चे पैदा होते हैं जो आतंकवादी हो जाते हैं लेकिन उनका नाश करने के लिए देवियों ने दूसरी व्यवस्था की है। हिन्दुओं में भी शैतान होते हैं ,वे भी आदमी तो आदमी इमारतों और कब्रों तक को जमीदोज कर देते हैं ,लेकिन उनका इलाज हमारी देवियों के पास नहीं  है। 

चूंकि  हमारे सनातनियों को अब विक्रम सम्वत में आस्था है इसलिए उन्हें इस नववर्ष की बधाइयां ,चूंकि आज ही ईद है इसलिए मुसलमानों को ईद मुबारक और म्यांमार के भूकंप पीड़ितों को अपनी हार्दिक संवेदनाएं देते हुए मै अपने आपको खुशनसीब समझता हूँ क्योंकि आज से 9  दिन तक मुझे शक्ति की आराधना की छूट है।  मै कमरे में ,घर की छत पर या सड़क पर ,कहीं भी आराधना कर सकता हू।  तमाम पाबंदियां  तो विधर्मीयों  के लिए हैं।  वे भारतीय होकर भी हमारे लिए प्रवासी हैं। 

@ राकेश अचल

30 मार्च रविवार 2025 का पंचांग




शनिवार, 29 मार्च 2025

अमर सिंह राव दिनकर दतिया जिला अध्यक्ष , प्रेम नारायण आदिवासी प्रदेश सचिव बने

 ग्वालियर । दलित  आदिवासी महापंचायत के संरक्षक डॉक्टर जबर सिंह अग्र के निर्देशानुसार एवं वरिष्ठ समाजसेवियों की अनुशंसा पर अमर सिंह राव दिनकर को दतिया का जिला अध्यक्ष एवं प्रेम नारायण आदिवासी को प्रदेश के सचिव पद पर प्रदेश अध्यक्ष महेश मदुरिया ने मनोनीत किया है। 

  मनोनीत होने पर दलित आदिवासी महापंचायत  (DAM-दाम) मध्य प्रदेश के साथियों ने हर्ष व्यक्त किया। प्रदेश अध्यक्ष महेश मदुरिया ने बताया की आज प्रदेश एवं देश में अनुसूचित जाति -जनजाति गरीबों के ऊपर हो रहे अन्याय अत्याचार शोषण एवं हक अधिकारों के लिए हम संगठित होकर , आवाज़ उठाएं और संवैधानिक तरीके से इन वर्गों को न्याय दिलाने का कार्य करना चाहिए ।

 दलित आदिवासी महापंचायत (दाम) एक गैर राजनीतिक सामाजिक संगठन है हम सभी अनुसूचित जाति- जनजाति से अनुरोध करते हैं कि इस विषम परिस्थिति में संगठन से जुड़कर देश एवं प्रदेश के सामाजिक ,आर्थिक, शैक्षणिक विकास उन्नति के लिए हमें आगे आना चाहिए हमें अपने महान संतों एवं महान पुरुषों तथा हमारे बुजुर्गों बुद्धिजीवियों के सपनों को साकार करने के लिए आगे आगे आए और पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से मानवीय आधार पर कार्य करें। 

  अमर सिंह राव दिनकर दतिया जिला अध्यक्ष में प्रदेश सचिव प्रेम नारायण आदिवासी के बनने पर हर्ष व्यक्त करने वालों में सर्वश्री संभागीय अध्यक्ष हाकिम सिंह चौकोटिया जी ग्वालियर के जिला अध्यक्ष सोलंकी एवं कार्यकारी अध्यक्ष सी एल बरैया जी भिंड के जिला अध्यक्ष श्री बाबूराम गोयल ,शिवपुरी के जिला अध्यक्ष डॉक्टर रामदास माथोरिया जी सागर के जिला अध्यक्ष जीवनलाल अहिरवार जी, कटनी के जिला अध्यक्ष नोने सिंह गौर आदिवासी ,पन्ना के जिला अध्यक्ष तिलक वर्मा जी, छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष श्री डोडियार जी, अमर सिंह चौहान प्रिंस गोड़िया आदि को बनाने पर हर्ष व्यक्त किया। 

कांपती धरती और हांफता सूर्य


म्यांमार में धरती काँपी तो डेढ़ सौ से ज्यादा लोग मौत का शिकार हो गए और हजारों लोग घायल हो गए ,दूसरी  तरफ दुनिया ने 29  मार्च को साल के पहले सूर्यग्रहण का सामना किया ।  कहीं सूरज हांफता नजर आया तो कहीं इसके दर्शन नहीं हुए। भारत में सूर्यग्रहण नजर नहीं आया,आता भी कैसे ,यहां तो सूर्य को ग्रहण लगे एक दशक से जायदा बीत चुका है। प्रकृति में हो रही इस हलचल के बारे में हम कुछ सोच नहीं पा रहे हैं ,क्योंकि हमारे सामने जेरे बहस दूसरे मुद्दे हैं। 

भूकंप को पुरबिया भू-डोल कहते है।  दो फीसदी से ज्यादा लोग इसे ' अर्थक्वेक ' कहते हैं क्योंकि उन्हें हिंदी नहीं आती या हिंदी बोलने में तकलीफ होती है। लेकिन बहस का मुद्दा भाषा नहीं आपदा है।  म्यांमार में आए भूकंप से हुयी तबाही हृदयविदारक है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है कहना कठिनहै। हम क्या, कोई दावे के साथ नहीं कह सकता कि ये भूकंप क्यों आया या ये सूर्यग्रहण क्यों लगा ? इस बारे में विज्ञान की अपनी परिभाषाएं हैं और इन्हीं पर हम भरोसा करते आये है। हमारे पास भूकंप की आहट सुनने की मशीने है।  भूकंप की तीव्रता को झेलने वाली तकनीक  भी है ,किन्तु  सब असफल साबित होती है। जनहानि भी करता है भूकंप और धनहानि भी। 

म्यांमार में शुक्रवार आए तेज भूकंप से भीषण तबाही हुई है. इस आपदा से अब तक 140 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.7 रही।  जिसका असर पड़ोसी देश थाईलैंड में भी देखने को मिला है।  राजधानी बैंकॉक की एक 30 मंजिला निर्माणाधीन इमारत भूकंप के झटके से जमींदोज हो गई जिसमें 8 लोगों मौत हो चुकी है. इसके अलावा 100 ज्यादा लोगों के इमारत के मलबे में दबे होने की आशंका है। इस भूडोल की वजह से हमने बहुमंजिला इमारत पर बने स्विमिंग पूल को जाम की तरह छलकते  देखा है। इस आपदा के शिकार लोगों के प्रति हमारी हार्दिक सवेदना है। आखिर म्यांमार हमारा पड़ौसी मुल्क है ,ये बात और है कि  म्यांमार के रोहिंगिया मुसलमानों से हमारी सरकार हमेशा   परेशान रहती है। 

अब बात करें सूर्यग्रहण की।  वर्ष 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को आंशिक रूप में होगा। नासा के अनुसार यह आंशिक सूर्य ग्रहण यूरोप, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका तथा आर्कटिक के कुछ क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। भारत में यह नहीं दिखाई दिया  क्योंकि इस दौरान चंद्रमा की छाया भारतीय उपमहाद्वीप तक नहीं पहुंचेगी।सूर्य और चन्द्रमा और धरती के बीच ये छाया युद्ध आज का नहीं है।  बहुत पुराना है।  हमारे पास तो इसे लेकर बाकायदा दंतकथाएं हैं ,आख्यान हैं। और कहावतें भी। हम सनातनी लोग हैं। आज भी इन दंतकथाओं से बाहर नहीं आये हैं और न आना चाहते हैं ,क्योंकि इन्हीं में सुख है। 

कहावतों की बात करें तो भारत में ग्रहण केवल सूर्य या चन्द्रमा को ही परेशान नहीं करता बल्कि राजनीति को,धर्म को,अर्थव्यवस्था को और आम नागरिकों को भी परेशान करता है।  आजकल भारत भूकंप से महफूज है लेकिन सियासी सूर्यग्रहण से अपने आपको नहं बचा सका।  भारत की समरसता,धर्मनिरपेक्षता ,सम्प्रभुता, सभी को ग्रहण लगा है साम्प्रदायिकता का,संकीर्णता का ,धर्मान्धता का। हमारे पास पहले ये सब चीजें  नहीं थी ।  ये सियासी ग्रहण का ही उत्पाद हैं और अब इनका असर  दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि भांग पूरे कुएं  में घुल चुकी है। सूर्यग्रहण हो या चंद्र ग्रहण सभी को प्रभावित करता है। वो हिन्दूमुस्लमान नहीं देखता ,लेकिन हमारी धर्मान्धता की सत्ता तो  हिन्दू-मुसलमान की बैशाखियों पर ही टिकी है।

हम आजादी हासिल करने के बाद ' नौ दिन चले लेकिन केवल अढ़ाई कोस ' ही चल पाए। हमारे साथ ,हमारे पहले,हमारे बाद आजाद हुए देश कहीं के कहीं पहुँच गए किन्तु हम जहाँ थे ,वहां से भी पीछे जाते नजर आ रहे हैं।  जो साम्प्रदायिकता,धर्मान्धता आजादी के समय हुए विभाजन के बाद समाप्त हो जाना चाहिए थी ,वो आज भी ज़िंदा है।  कुछ मुठ्ठीभर लोग हैं सियासत में जो आजादी के बाद पकिस्तान की तर्ज पर भारत को हिंदुस्तान बनाना चाहते थे ,उस समय जब जंगे आजादी लड़ी जा रही थी ,तब वे बिलों में थे । आज वे सब बिलों से बाहर आ चुके हैं और एक बार फिर पाकिस्तान के मुकाबले हिन्दुओं का हिंदुस्तान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि हमें चीन जैसा मजबूत और अमेरिका जैसा महान बनना था।  

भारत के संविधान ने किसी को कोशिश करने से नहीं रोका ,इसलिए देश में पहली बार सड़कों पर ईद की नमाज पढ़ने पर पासपोर्ट छीनने की धमकियां दी जा रहीं है।  नवरात्रि पर माँस  बिक्री के इंतजाम किये जा रहे है।  कब्रें और मस्जिदों को खोदने की मुहीम तो अब  पुरानी पड़ गयी है। धरती के नीचे से आने वाला भूकंप तो तबाही करके शांत हो जाता है।  प्रकृतितिक आपदा पर  पीड़ित देश को दुनिया भर   से राहत भी मिल जाती है किन्तु धर्मान्धता और संकीर्णता के भूकंप के शिकार देश को दुनिया इमदाद नहीं करती । दुनिया तमाशा देखती है ।  हमारी कूपमंडूकता पर हंसती है। लेकिन हमारे ऊपर इन सबका कोई असर नहीं पड़ता। हम अपने पांवों पर कुल्हाड़ियाँ  चलने में ही बुद्धिमत्ता समझते हैं।

हमारे पड़ौसी हमसे बिदके हुए हैं। नेपाल से हमारे रिश्ते खराब हैं। बांग्लादेश अब चीन का बगलगीर हो रहा है। बांग्लादेश के  यूसुफ़ साहब चीन की मेहमानी का मजा ले रहे हैं। हमने तो उन्हें लिफ्ट दी नहीं  ।  पाकिस्तान से तो हमारे सदियों पुराने खराब रिश्ते हैं। इन रिश्तों को जब पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं सुधार पाए तो पंडित   नरेंद्र मोदी की क्या बिसात ? हमारे प्रधानमंत्री ने दोस्त कम, दुश्मन ज्यादा बनाये हैं। अब हमारे हाथों में न शांति कपोत है और न निर्गुटता का कोई अस्त्र। हमारी लड़ाई हमसे ही है। इसलिए हमें किसी नए दुश्मन की जरूरत नहीं है। हम आपस में ही लड़-खप मरेंगे। हमारे पास इसका फुलप्रूफ इंतजाम है। हमने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। अब भगवान ने भी हमारी मदद करने से इंकार कर दिया है।  भगवान कहते हैं कि  जब हमारा काम धीरेन्द्र शास्त्री जैसे बकलोल कर सकते हैं ,तो हमारा क्या काम तुम्हारे  अंगने में ?

बहरहाल आज मैंने भी बकलोल ही की है लेकिन मेरी बकलोल आपको सोचने के लिए मजबूर कर सकती है।  मुमकिन है मुझसे दूर भी कड़े,लेकिन मैं तो मुसलमान नहीं हूँ जो अपना मुल्क छोड़कर कहीं और चला जाऊं । मुसलमान भी होता तो मुल्क नहीं छोड़ता ।  किसी मुसलमान ने भी इतनी तकलीफों कि बावजूद हिंदुस्तान नहीं छोड़ा है। हिंदुस्तान छोड़ने वाले तो माल्या हैं ,मोदी हैं ,जो हिन्दू हैं मुसलमान नहीं।  मैं आपसे कल फिर मिलूंगा ,किसी नए मजमून के साथ। खुदाहाफिज़। 

@ राकेश अचल

इंजी. राहुल अहिरवार राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद मध्य प्रदेश के सोशल मीडिया प्रभारी बनें

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद नई दिल्ली ने इंजी. राहुल अहिरवार को मध्य प्रदेश के सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में नियुक्त किया है। यह नियुक्ति मध्य प्रदेश में सोशल मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

इंजी. राहुल अहिरवार कई वर्षो से सामाजिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। वह आम नागरिकों एवं अनुसूचित जाति जनजाति के समस्त नागरिकों की प्रत्येक समस्याओं को सोशल मीडिया के माध्यम से शासन तक पहुंचाते हैं और समाधान करवाते हैं।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति विकास परिषद नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण मांगरिया जी ने इंजीनियर राहुल अहिरवार को सोशल मीडिया प्रभारी मध्य प्रदेश नियुक्त होने पर बधाई शुभकामनाएं दी। उन्होंने आशीर्वाद दिया कि इंजी. राहुल अहिरवार अपने अनुभव और क्षमता के साथ इस पद पर उत्कृष्ट कार्य करेंगे और मध्य प्रदेश की जनता और संगठन की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

इस अवसर पर  इंजी. राहुल अहिरवार को सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यम से बधाइयां दी गई।



29 मार्च 2025, शनिवार का पंचांग

*सूर्योदय :-* 06:15 बजे  

*सूर्यास्त :-* 18:36 बजे 

*श्रीविक्रमसंवत्-2081* शाके-1947 

*श्री वीरनिर्वाण संवत्- 2551* 

*सूर्य*:- -सूर्य उत्तरायण, उत्तरगोल 

*🌧️ऋतु* : बसंत ऋतु 

*सूर्योदय के समय तिथि,नक्षत्र,योग, करण का समय* - 

आज चैत्र माह कृष्ण पक्ष *अमावस्या तिथि*  16:27 बजे  तक फिर प्रतिपदा तिथि चलेगी।

💫 *नक्षत्र आज* उत्तराभाद्रपद नक्षत्र 19:26 बजे  तक फिर रेवती नक्षत्र चलेगा।

    *योग* :- आज *ब्रह्म*  है। 

 *करण*  :-आज  *नाग* हैं।

 💫 *पंचक* :- पंचक चल रही है। भद्रा , गंडमूल 19:26 बजे से है।

*🔥अग्निवास*: आज पाताल में है।

☄️ *दिशाशूल* : आज पूर्व दिशा में।

*🌚राहूकाल* :आज 09:21 से 10:53 बजे  तक  अशुभ समय है।

*🌼अभिजित मुहूर्त* :- आज 12:04 बजे से 12:53 बजे तक  शुभ है।

प्रत्येक बुधवार को अशुभ होता है ।

*पर्व त्यौहा*:- देव पितृकार्य चैत्र अमावस्या,शनिश्चरी अमावस्या

*मुहूर्त* : - कोई नहीं 

🪐  *सूर्योदय समय ग्रह राशि विचार* :-

 सूर्य-मीन, चन्द्र- मीन ,मंगल-मिथुन, बुध-मीन, गुरु-वृष, शुक्र-मीन, शनि-कुंभ, राहू- मीन,केतु-कन्या, प्लूटो-मकर ,नेप्च्यून-मीन

हर्षल-मेष में आज है।

*🌞चोघडिया, दिन*

काल 06:16 - 07:48 अशुभ

शुभ 07:48 - 09:21 शुभ

रोग 09:21 - 10:53 अशुभ

उद्वेग 10:53 - 12:26 अशुभ

चर 12:26 - 13:59 शुभ

लाभ 13:59 - 15:31 शुभ

अमृत 15:31 - 17:04 शुभ

काल 17:04 - 18:36 अशुभ

*🌘चोघडिया, रात*

लाभ 18:36 - 20:04 शुभ

उद्वेग 20:04 - 21:31 अशुभ

शुभ 21:31 - 22:58 शुभ

अमृत 22:58 - 24:25*शुभ

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें - ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन (राष्ट्रीय गौरव अवॉर्ड प्राप्त)

जिनकी दर्जनों जटील मुद्दों पर भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई हैं।

मो . 9425187186

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3 अप्रैल2025, गुरुवार का पंचांग

*सूर्योदय :-* 06:10 बजे   *सूर्यास्त :-* 18:38 बजे  *श्रीविक्रमसंवत्-2082* शाके-1947  *श्री वीरनिर्वाण संवत्- 2551*  *सूर्य*:- -सूर्य उत्तरा...